कैसे तंत्रिका तंत्र मजबूत बनाने के लिए?HealthPlanet

Posted on Thu 8th Dec 2022 : 16:12

तंत्रिका तंत्र न्यूरॉन नामक विशेष कोशिकाओं के माध्यम से पूरे शरीर में संकेत या संदेश भेजने का काम करती हैं। यह संदेश ही सभी जरूरी अंगों को हिलाने, दबाव और दर्द जैसी संवेदनाओं को महसूस करने में मदद करता है। अगर इन तंत्रिकाओं में किसी तरह की रुकावट आ जाए तो पूरे शरीर का मूवमेंट रूक जाता है। व्‍यक्ति का चलना-उठना भी दूभर हो सकता है। यही कारण है कि लोगों को अपने नर्वस सिस्‍टम का विशेष ध्‍यान रखने की सलाह दी जाती है।

नर्वस सिस्‍टम को स्ट्रॉन्ग और फिट बनाए रखने के लिए नियमित रूप से योगासन या एक्सरसाइज करना बहुत जरूरी होता है। NCBI पर प्रकाशित रिसर्च रिपोर्ट में योग को नर्वस सिस्‍टम के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यहां पर हम आपको ऐसे पांच योगासन के बारे में बता रहे हैं, जो नर्वस सिस्‍टम को हेल्दी बनाए रखने में मदद करते हैं।

​बालासन योग का अभ्यास

मांसपेशियों के तनाव को कम करने और तंत्रिका तंत्र को आराम दिलाने में बालासन योग को काफी फायदेमंद माना जाता है। यह योगासन पीठ, गर्दन और कंधों से तनाव को दूर करने में मदद करती है। इस योग के नियमित अभ्यास से मानसिक और भावनात्मक रूप से भी कई लाभ मिलते हैं। तनाव-चिंता को कम करने के साथ मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को आराम पहुंचाने में इस योग के अभ्यास को काफी कारगर माना जाता है।

​सेतुबंधासन योग

सेतुबंधासन योग को ब्रिज पोज भी कहा जाता है। यह योगासन भी सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। इस योगासन से पीठ और कमर की समस्याओं में आराम मिलने के साथ रीढ़ की हड्डी के लचीलापन बनाने में भी मदद मिलती है। यह योग आपकी तंत्रिका तंत्र को आराम दिलाने के साथ शरीर में ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने का काम करता है। सेतुबंधासन योग मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है।

​प्राणायाम का अभ्यास भी फायदेमंद

कपालभाति, अनुलोम विलोम, भस्त्रिका, भ्रामरी, उज्जायी जैसे प्राणायाम भी नर्वस सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए काफी फायदेमंद होता है। ये प्राणायाम तंत्रिकाओं को शांत करने और मस्तिष्क के तनाव को कम करने का काम करते हैं। नियमित रूप से इन प्राणायाम के अभ्यास की आदत आपके लिए शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरीके से फायदेमंद हो सकती है।

​सूर्यभेदी प्राणायाम

सूर्यभेदी प्राणायाम शरीर के तंत्रिका तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में मददगार है। सूर्यभेदी अभ्‍यास के दौरान हमारे शरीर में रक्त संचार तेजी से बढ़ जाता है। जिसकी वजह से हमारे तंत्रिका तंत्र को सभी पोषक तत्व रक्त के द्वारा आसानी से मिल जाते हैं। इससे सिस्‍टम बेहतर तरीके से काम करने लगता है।

​अर्ध हलासन

अर्ध हलासन के नियमित अभ्यास से मांसपेशियां व तंत्रिकाएं अपना काम अच्छे से करने लगती हैं। शरीर की सभी तंत्रिकाएं हमारे तंत्रिका तंत्र से जुड़ी हुई हैं। अर्ध हलासन अभ्‍यास के दौरान रक्त हमारे पैरों से होता हुआ तेजी से पेट की तरफ आता है और मस्तिष्क की तरफ जाता है। इससे तंत्रिका तंत्र को जरूरी पोषक तत्व, ऑक्सीजन आदि की आपूर्ति आसानी से हो जाती है। यह आसन कमजोर मांसपेशियों को आराम देता है।

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